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गोविंद गुरु, भीलों के एक लोकप्रिय संत थे जिन्होंने मानगढ़ पहाड़ी को आस्था का केंद्र बनाया था। उन्होंने भील समुदाय को जागृत किया और उन्हें देशभक्ति की भावना से भर दिया।

भील इतने प्रेरित थे कि उन्होंने आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। बाद में, 1500 गुरुभक्त भीलों ने ब्रिटिश सेना के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया।

इसलिए इसे राजस्थान का जलियांवाला बाग भी कहा जाता है।

ऐसे थे गोविंद गुरु

इस शख्स का नाम गोविंद गुरु था और उनका जन्म डूंगरपुर जिले के बांसिया गांव में 20 दिसंबर 1858 को हुआ था। क्रांतिकारी संत गोविंद गुरु के बड़े बेटे हरिगिरि का परिवार बांसिया में छोटे बेटे अमरूगिरि का परिवार बांसवाड़ा जिले के तलवाड़ा के पास उमराई में बसा है। गोविंद गुरु के जन्म स्थान बांसिया में निवासरत परिवार की छठी पीढ़ी उनकी विरासत को संभाले हुए है। गोविंद गुरु के पुत्र हरिगिरि, उनके बेटे मानगिरि, उनके बेटे करणगिरि, उनके बेटे नरेंद्र गिरि और छठी पीढ़ी में उनके मानगिरि, उनके बेटे करणगिरि, उनके बेटे नरेंद्र गिरि और छठी पीढ़ी में उनके बेटे गोपालगिरि मड़ी मगरी पर रहकर गुरु के उपदेशों को जीवन में उतारने का संकल्प प्रचारित कर रहे हैं।